शीर्षक: शेर और चालाक सियार
बहुत समय पहले की बात है। एक घना जंगल था, जहाँ एक शक्तिशाली शेर रहता था। वह जंगल का राजा था और अपनी ताकत के कारण सभी जानवर उससे डरते थे। लेकिन समय के साथ वह शेर बूढ़ा हो गया। अब वह शिकार करने में असमर्थ था। धीरे-धीरे भूख से उसकी हालत खराब होने लगी।
(छोटा विराम)
एक दिन शेर को एक तरकीब सूझी। उसने जंगल में एक गुफा के पास अपना डेरा जमा लिया और जोर से दहाड़ते हुए घोषणा की, "मैं अब बूढ़ा हो गया हूँ। कोई भी जानवर मेरे पास आएगा, मैं उसे नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा। मैं तुम्हारी समस्या सुनूंगा और तुम्हारी मदद करूंगा।"
(छोटा विराम, सस्पेंस बढ़ाएँ)
सभी जानवर उसकी बात पर यकीन कर बैठे। धीरे-धीरे जानवर शेर के पास अपनी समस्या लेकर जाने लगे। लेकिन शेर उन्हें अपनी गुफा के अंदर बुलाता और जैसे ही वे गुफा में जाते, वह उन्हें खा जाता।
(सुनने वालों को थोड़ा आश्चर्य दें)
एक दिन एक चालाक सियार जंगल से गुजर रहा था। उसने गुफा के बाहर जानवरों के पैरों के निशान देखे। उसने गौर किया कि गुफा के अंदर जाने के निशान तो हैं, लेकिन बाहर आने के कोई नहीं।
सियार समझ गया कि मामला कुछ गड़बड़ है। उसने दूर से ही शेर को आवाज दी, "महाराज, मैं भीतर आऊँगा, लेकिन पहले आप बाहर आइए।"
शेर ने बहाना बनाया, "मैं बूढ़ा हूँ, बाहर नहीं आ सकता।"
सियार हँसते हुए बोला, "आपके जाल में मैं नहीं फँसने वाला।" और वह तेज़ी से वहाँ से भाग गया।
(अंत में संदेश)
कहानी की सीख: "सावधानी और समझदारी से हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है।"
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