Wednesday, November 20, 2024

कहानी: "दो बंदरों की शरारत

एक घने जंगल में दो शरारती बंदर रहते थे, जिनके नाम थे मिक्की और टिक्की। मिक्की हमेशा नई चीज़ें खोजने में लगा रहता, जबकि टिक्की खाने-पीने का शौकीन था। दोनों हर दिन कुछ नया करते, और उनकी शरारतें पूरे जंगल में मशहूर थीं।  


एक दिन, मिक्की ने जंगल के बाहर एक छोटे गाँव को देखने का फैसला किया। वह टिक्की से बोला, "चल, आज गाँव चलते हैं। सुना है, वहाँ बहुत सारे फल और खाने की चीज़ें मिलती हैं।" टिक्की ने फौरन हामी भर दी, क्योंकि उसे खाने का बहाना चाहिए था।  


गाँव पहुँचते ही, दोनों ने एक पेड़ पर बैठकर चारों तरफ नजर डाली। वहाँ एक किसान अपनी टोकरी में ढेर सारे पके केले ले जा रहा था। टिक्की की आँखें चमक उठीं। वह मिक्की से बोला, "बस, मुझे केले चाहिए!"  


मिक्की ने योजना बनाई। उसने टिक्की से कहा, "जब मैं किसान का ध्यान भटकाऊँ, तब तुम टोकरी से केले चुरा लेना।" टिक्की ने सिर हिला दिया।  


मिक्की ने किसान के सिर पर पत्थर गिरा दिया। किसान चौंककर ऊपर देखने लगा, "अरे, ये क्या हुआ?" जैसे ही किसान ने ऊपर देखा, टिक्की ने तेजी से टोकरी से केले निकाल लिए और दोनों पेड़ पर चढ़ गए। किसान जब तक समझ पाता, दोनों केले लेकर भाग चुके थे।  


लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। टिक्की खाने में इतना मग्न हो गया कि उसे पता ही नहीं चला कि पास में एक कुत्ता खड़ा है। कुत्ते ने टिक्की को देख लिया और भौंकते हुए उसकी ओर दौड़ पड़ा।  


टिक्की डर के मारे केले छोड़कर भागा और मिक्की से चिल्लाया, "तूने मुझे फँसा दिया!" मिक्की हँसते हुए बोला, "मैंने नहीं, तेरी लालच ने तुझे फँसाया।"  


दोनों भागते-भागते जंगल में लौट आए। टिक्की ने सबक सीखा कि लालच अच्छी बात नहीं। मिक्की ने भी तय किया कि अगली बार ऐसी योजना बनाएगा, जिसमें किसी की जान को खतरा न हो।  


"शरारतें मजेदार होती हैं, लेकिन सच्ची दोस्ती उससे भी ज्यादा मजेदार है।"

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