Sunday, November 24, 2024

खोया हुआ सपना || story in hindi

 

गाँव के एक छोटे से घर में राहुल नाम का एक लड़का रहता था। राहुल का सपना था कि वह एक दिन बड़ा चित्रकार बने। उसकी कला में जान थी—पेड़ों की शाखाओं से लेकर पक्षियों के पंखों तक, सब कुछ उसकी पेंटिंग में जीवंत लगता। लेकिन गरीबी ने उसके सपनों पर धूल डाल दी।  


हर दिन वह खेतों में काम करता और रात को थका-हारा घर लौटता। लेकिन उसकी आँखों में अपने सपनों की चमक बनी रहती। एक रात जब वह आकाश की ओर देख रहा था, तो उसने खुद से कहा,  

"अगर मेरे सपने सच करने की ताकत नहीं है, तो क्या फायदा इस मेहनत का?"  


दूसरे दिन, गाँव में मेला लगा। मेले में एक चित्र प्रतियोगिता हो रही थी, जिसमें भाग लेने का राहुल को मौका मिला। पर समस्या यह थी कि उसके पास न रंग थे, न कागज। उसने हार मानने की बजाय अपने पुराने कपड़ों के टुकड़ों को कैनवास और खेत की मिट्टी को रंग बना लिया।  


राहुल ने एक ऐसा चित्र बनाया जो पूरी भीड़ को खींचकर उसकी ओर ले आया। उस पेंटिंग में एक किसान के सपनों और संघर्षों को दर्शाया गया था। गाँव वालों ने उसकी सराहना की, और प्रतियोगिता के जज ने उसे प्रथम पुरस्कार दिया।  


वह दिन राहुल की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गया। उसकी मेहनत और जुनून ने उसे उस मुकाम पर पहुँचाया, जहाँ गरीबी भी उसके सपनों को नहीं रोक सकी।  


शिक्षा:

सपनों को पूरा करने के लिए हालात नहीं, हौसला चाहिए। मुश्किलें केवल एक पड़ाव हैं, जो हमें हमारी मंजिल तक पहुँचने में मदद करती हैं।  

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