Saturday, November 16, 2024

अनजान कॉल || story of Stranger

रात के 12 बजे थे। पूरे शहर में अजीब सी खामोशी थी। नीरा अपने ऑफिस के प्रोजेक्ट में व्यस्त थी, जब अचानक उसका फोन बज उठा। उसने स्क्रीन देखी—कोई अनजान नंबर। नीरा ने कॉल उठाई।

"हैलो?" उसने धीरे से कहा।

दूसरी तरफ से एक गहरी आवाज आई, "क्या तुम जानती हो कि तुम्हारे घर के पास कौन खड़ा है?"

नीरा के रोंगटे खड़े हो गए। वह बालकनी की तरफ भागी। नीचे सड़क पर दूर तक अंधेरा पसरा हुआ था। कोई नहीं था।

"कौन हो तुम?" उसने हिम्मत जुटाकर पूछा।

"तुम्हारा पुराना दोस्त... मुझे तुमसे बस एक आखिरी बात करनी है," आवाज और भी गहरी हो गई।

नीरा का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसे याद नहीं आया कि उसने कभी इस तरह की आवाज सुनी हो। उसने फोन काटने की कोशिश की, लेकिन कॉल कट ही नहीं रही थी।

"तुम क्यों भाग रही हो? मैं तो बस तुम्हें देख रहा हूं," आवाज ने एक खौफनाक हंसी के साथ कहा।

नीरा ने डर के मारे फोन फेंक दिया और दरवाजे की कुंडी चेक की। अचानक, बालकनी का दरवाजा अपने आप खुल गया। ठंडी हवा के झोंके ने पूरे कमरे को झकझोर दिया।

फोन अचानक फिर से बज उठा। इस बार स्क्रीन पर लिखा था: "डोर मत खोलना।"

नीरा ने जल्दी से फोन उठाया, "तुम क्या चाहते हो?"

दूसरी तरफ से आवाज आई, "तुम्हारा सामना सच से करवाना। तुमने पांच साल पहले जो किया था, उसे याद करो।"

नीरा हक्का-बक्का रह गई। पांच साल पहले उसने अपने एक सहकर्मी की गलती पर पर्दा डालने के लिए उसे फंसाया था, और वह जेल चला गया था।

"तुम कौन हो?" उसने चीखकर पूछा।

"सच," आवाज ने जवाब दिया।

अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई। नीरा ने स्क्रीन की तरफ देखा। अब वहां लिखा था: "मैं आ गया हूं।"


दरवाजा धीरे-धीरे खुलने लगा। नीरा ने अपनी सारी हिम्मत बटोरी और दरवाजे की तरफ भागी। लेकिन जब उसने दरवाजा खोला, तो वहां कोई नहीं था—सिवाय एक आईने के।

आईने में उसकी परछाई हंस रही थी। और तभी फोन की स्क्रीन पर आखिरी मैसेज आया: "अब मैं तुम्हारे साथ हमेशा रहूंगा।"

अगली सुबह नीरा अपने घर में बेहोश मिली। उसका फोन कमरे के बीचों-बीच रखा था। लेकिन उसमें कोई कॉल हिस्ट्री नहीं थी।

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