एक बार जंगल में एक चालाक खरगोश और एक भूखा सियार रहते थे। सियार हमेशा खरगोश को पकड़ने की योजना बनाता लेकिन हर बार असफल हो जाता।
एक दिन सियार ने चालाकी से खरगोश से दोस्ती कर ली और उसे खाने पर बुलाया। खरगोश समझ गया कि सियार के मन में खोट है। उसने सोच-समझकर एक योजना बनाई।
खरगोश ने कहा, "मैं खाने के लिए तैयार हूँ, लेकिन पहले नदी के पास जाकर पानी पी लें।" सियार मान गया। नदी के पास खरगोश ने सियार को उसकी परछाई दिखाते हुए कहा, "देखो, पानी में दूसरा सियार खाना छीनने आ गया!"
सियार गुस्से में अपनी परछाई पर झपटा और नदी में गिर गया। खरगोश हँसते हुए भाग गया और सियार को उसकी मूर्खता का एहसास हुआ।
शिक्षा:
चालाकी और समझदारी से बड़ी से बड़ी समस्या हल की जा सकती है।
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