चतुर बिल्लू और चालाक किसान
गांव में एक किसान रामू और उसका पालतू बिल्लू रहता था। बिल्लू एक साधारण बिल्ली नहीं थी, बल्कि बेहद चतुर और चालाक थी। रामू की दिनचर्या में बिल्लू उसका साथी था, लेकिन बिल्लू की सबसे बड़ी समस्या थी उसका आलसी स्वभाव। वह बस आराम करना और स्वादिष्ट खाना खाना पसंद करती थी।
चावल की चोरी
एक दिन रामू ने देखा कि उसके चावल का ड्रम आधा खाली हो गया है। उसने सोचा, "अरे, ये चावल तो पूरे महीने चलने चाहिए थे। आखिर ये जा कहां रहे हैं?"
रामू ने बिल्लू से कहा, "बिल्लू, तुम दिनभर घर में रहती हो। देखो तो सही, कौन मेरे चावल चुरा रहा है।"
बिल्लू ने मन ही मन सोचा, "अब मुझे काम करना पड़ेगा।" लेकिन वह काम करने की बजाय सो गई।
मजेदार घटना
अगली सुबह रामू ने फिर चावल कम पाया। इस बार उसने चावल के ड्रम के पास झांककर देखा। वहां कुछ चूहे मौज से चावल खा रहे थे। रामू ने बिल्लू को डांटते हुए कहा, "तू क्या कर रही थी? तुझे तो इन चूहों को भगाना चाहिए था!"
बिल्लू ने आलसी अंदाज में जवाब दिया, "चूहे भागेंगे क्यों? जब तक मैं यहां सो रही हूं, उन्हें कौन डराएगा?"
रामू को बिल्लू की चतुराई का अंदाजा हो गया। उसने बिल्लू को सबक सिखाने की ठानी।
चतुराई का बदला
अगले दिन रामू ने बिल्लू की पसंदीदा मछली को एक जाल में रख दिया। बिल्लू ने जैसे ही मछली देखी, वह जाल की ओर दौड़ी। जाल में फंसते ही बिल्लू चिल्लाने लगी, "रामू भैया, मुझे छोड़ दो! मैं अब से चूहों को भगाने का वादा करती हूं।"
रामू ने मुस्कुराते हुए कहा, "देख, बिल्लू। जैसे तुझे मछली चाहिए, वैसे मुझे चावल चाहिए। दोनों को बचाने के लिए मेहनत करनी होगी।"
अंत में सीख
बिल्लू ने शर्मिंदा होकर कहा, "अब से मैं अपनी जिम्मेदारी निभाऊंगी।" और वाकई, बिल्लू ने चूहे भगाने का काम शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में रामू के चावल सुरक्षित रहने लगे।
गांव वालों ने जब यह कहानी सुनी, तो वे हंसते हुए बोले, "रामू भैया, आपकी बिल्लू तो वाकई चतुर निकली, लेकिन आपने उसे और भी समझदार बना दिया।"
सीख:
हर किसी को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। आलस्य और चालाकी से केवल मुसीबत बढ़ती है। मेहनत और लगन ही असली चतुराई है।
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