हर सुबह, चहचहाते पक्षी उसकी डालियों पर गाना गाते, और दोपहर में गिलहरियाँ उसकी जड़ों के पास कूदती-फिरतीं। बंदर उसकी शाखाओं से झूलकर खेलते, और हिरण उसकी छाया में आराम करते। बड़ का पेड़ सबको प्यार करता था और उनकी हर परेशानी में मदद करता था।
एक दिन, जंगल में इंसानों का एक दल आया। वे बड़ के पेड़ को काटने की योजना बना रहे थे, क्योंकि उन्हें वहाँ सड़क बनानी थी। यह सुनकर जंगल के सभी जानवर परेशान हो गए। वे जानते थे कि अगर बड़ का पेड़ कट गया, तो उनका घर भी खत्म हो जाएगा।
अगली सुबह, सभी जानवर मिलकर योजना बनाने लगे। हाथी ने अपने बड़े पैरों से मिट्टी खोदकर रास्ता बंद कर दिया। बंदरों ने इंसानों के सामान चुरा लिया और उसे दूर जंगल में फेंक दिया। पक्षियों ने जोर-जोर से शोर मचाकर इंसानों को परेशान किया, और गिलहरियाँ उनके जूतों में नट्स भरकर उन्हें चिढ़ाने लगीं।
इंसान समझ गए कि यह काम इतना आसान नहीं होगा। उन्होंने बड़ के पेड़ को काटने का विचार छोड़ दिया और जंगल से वापस चले गए।
जंगल में फिर से खुशी लौट आई। सभी जानवरों ने बड़ के पेड़ के चारों ओर इकट्ठा होकर जश्न मनाया। बड़ का पेड़ मुस्कुराया और कहा, "यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है, यह हमारी दोस्ती की ताकत है। अगर हम साथ हैं, तो कोई भी हमें कमजोर नहीं कर सकता।"
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