एक हरे-भरे जंगल में, एक विशाल आम का पेड़ खड़ा था। यह पेड़ जंगल का सबसे पुराना और सबसे ऊँचा पेड़ था। उसकी शाखाएँ दूर-दूर तक फैली हुई थीं, और गर्मियों में उसके मीठे और रसीले आम पूरे जंगल को महकाते थे। जंगल के सभी पक्षी और जानवर इस पेड़ से बहुत प्यार करते थे। वह पेड़ न केवल उन्हें फल देता था, बल्कि उसकी ठंडी छाया में सभी आराम भी करते थे।
लेकिन इस साल कुछ अलग हुआ। पेड़ पर आम तो लगे थे, लेकिन वे हर साल की तरह मीठे नहीं थे। पक्षियों ने आम चखा, तो खट्टा लगा। गिलहरियों ने कोशिश की, तो उन्हें भी अच्छा नहीं लगा। जानवरों ने सोचा, "क्या इस पेड़ ने हमसे नाराज़ होकर ऐसे फल दिए हैं?" सब परेशान थे।
तभी जंगल के बीच में से एक छोटा तोता उड़ता हुआ आया। वह बहुत समझदार था। उसने पेड़ से पूछा,
"हे पेड़, क्या बात है? इस साल तुम्हारे फल मीठे क्यों नहीं हैं?"
पेड़ ने भारी आवाज़ में कहा,
"मेरे दोस्तों, मैं बीमार नहीं हूँ। लेकिन मैं थोड़ा उदास हूँ। हर साल मैं तुम सबको अपने फल देता हूँ। लेकिन इस साल मुझे कोई ऐसा मिला, जिसने मुझे नहीं समझा। उसने मेरी शाखाएँ तोड़ दीं, मुझे नुकसान पहुँचाया। इससे मेरा दिल दुखी है।"
तोता समझ गया। उसने सभी जानवरों और पक्षियों को इकट्ठा किया और कहा,
"हमें पेड़ का ख्याल रखना चाहिए। वह हमें बिना किसी स्वार्थ के हर साल फल देता है। हमें उसकी रक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई उसे नुकसान न पहुँचाए।"
सभी जानवरों और पक्षियों ने मिलकर फैसला किया कि वे अब पेड़ की देखभाल करेंगे। उन्होंने उसकी जड़ों के पास साफ-सफाई की, उसके आस-पास कचरा हटाया, और पानी डालने लगे। धीरे-धीरे, पेड़ का मूड बेहतर होने लगा।
कुछ ही महीनों में, जब अगला मौसम आया, तो पेड़ ने फिर से मीठे और रसीले आम देना शुरू कर दिया। अब पूरे जंगल में खुशबू फैल गई। पेड़ ने मुस्कुराते हुए कहा,
"तुम सबका प्यार और देखभाल ही मेरी असली दवा है।"
यह सुनकर सभी जानवर और पक्षी खुशी से झूम उठे। उन्होंने सीखा कि प्रकृति हमें बहुत कुछ देती है, और हमारा कर्तव्य है कि हम उसका ख्याल रखें।
शिक्षा:
प्रकृति हमें बिना किसी स्वार्थ के देती है। हमें पेड़-पौधों और पर्यावरण का ख्याल रखना चाहिए ताकि वे हमें बदले में खुशी और सुख दे सकें।
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