सच्चाई का जादुई उपहार
गांव के किनारे एक लड़का रहता था, नाम था राघव।
राघव मेहनती था, लेकिन कभी-कभी सच बोलने से बचता।
उसकी इस आदत से गांव के लोग उससे नाराज रहते।
पहला मोड़
एक दिन जंगल में राघव को एक बूढ़ा साधु मिला।
साधु ने कहा, "तुम्हारी सच्चाई को परखने का समय आ गया है।"
साधु ने उसे एक जादुई झोला दिया और कहा, "जो चाहे इसमें से मांगो, पर सच बोलना होगा।"
राघव ने सोचा, "आसान काम है!"
उसने झोले से सोने की मांग की।
सोना तुरंत निकल आया।
सच्चाई की परीक्षा
अगले दिन गांव के लोग आए और बोले, "तुमने ये सोना कहां से पाया?"
राघव झूठ बोलने वाला था, पर झोले से कुछ और मांगने की इच्छा ने उसे सच बोलने पर मजबूर किया।
आखिरी सबक
धीरे-धीरे, राघव ने महसूस किया कि सच्चाई से ही लोग उसकी इज्जत करने लगे।
झोला गायब हो गया, लेकिन सच्चाई का उपहार उसके साथ रह गया।
मोरल: सच्चाई हमेशा सबसे बड़ा जादू है।
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