एक छोटे से गांव में रोहन नाम का लड़का रहता था।
वह बहुत चालाक था, लेकिन कामचोर और झूठ बोलने में माहिर था।
गांव के लोग उससे परेशान रहते थे क्योंकि वह हमेशा दूसरों को धोखा देता था।
पहला मोड़
एक दिन रोहन जंगल में गया।
वहां उसे एक सुनहरा पत्ता मिला, जो अद्भुत चमक रहा था।
पत्ते पर लिखा था, "मुझे सही इंसान को दो, और तुम्हें जादुई इनाम मिलेगा।"
रोहन ने सोचा, "मैं इसे बेचकर अमीर बन जाऊंगा।"
वह पत्ता लेकर बाजार गया, लेकिन पत्ता किसी के हाथ में आते ही काला हो जाता।
लोगों ने उसे झूठा समझकर वहां से भगा दिया।
जादुई घटना
हताश होकर रोहन पत्ते को गांव के बूढ़े साधु को दिखाने गया।
साधु ने कहा, "यह पत्ता केवल ईमानदार व्यक्ति को इनाम देगा।"
रोहन ने पूछा, "तो मुझे क्या करना होगा?"
साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, "सच बोलो और दूसरों की मदद करो। तभी यह पत्ता तुम्हारे लिए जादुई होगा।"
दूसरा मोड़
रोहन ने अपनी आदत बदलने का निश्चय किया।
वह धीरे-धीरे गांव के लोगों की मदद करने लगा और हमेशा सच बोलने लगा।
कुछ दिनों बाद, पत्ता सुनहरा ही रहा जब रोहन ने उसे उठाया।
तभी पत्ते से जादुई रोशनी निकली और रोहन को एक बड़ा खेत और बहुत सारी फसल का वरदान मिला।
निष्कर्ष
रोहन ने गांववालों के साथ फसल बांटी और सबका प्रिय बन गया।
उसने सीखा कि ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।
मोरल:
"सच और मदद का रास्ता हमेशा सच्चा इनाम लाता है।"
श्रोता से सवाल:
अगर आपके पास जादुई पत्ता होता, तो आप उसका क्या करते?
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